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भैरव के विभिन्न रूप और उनकी उपासना: अष्ट भैरव से बटुक भैरव तक

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भैरव का अर्थ है भय को हरने वाला इनको क्षेत्रपाल भी कहा जाता है इनकी उपासना का सबसे अच्छा वक्त दिन का आखरी पहर होता है वोभी एकदम तरीके से साफ होकर मन्न साफ करके अर्चना की जाती है रविवार और मंगलवार का दिन इनका होता है। साथ ही साथ ये भी एक जागृत देवता हैं जैसे मां काली और राम भक्त हनुमान जी हैं!! बटुक भैरव भगवान भैरव का बाल स्वरूप है घरों में इनकी ही पूजा की जाती है क्योंकि ये प्रभु का सौम्य रूप है। काल भैरव भगवान भैरव का युवा और एग्रेसिव रूप है । इनकी पूजा अक्सर शमशान या घर से दूर बाहर एकांत में करने की सलाह है इन्हें शमशान भैरव या मसान भैरव भी बोला जाता है।  तंत्र शास्त्र में हिन्दू भगवान भैरव जी के आठ रूप हैं, जिन्हें अष्ट भैरव के नाम से जाना जाता है। शिवमहापुराण के अनुसार भगवान शिव के क्रोध से भैरवनाथ की उत्पत्ति हुई थी और इन्हें शिव गण के रूप में स्थान प्राप्त है। ये अष्ट भैरव आठ दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य) की रक्षा और नियंत्रण करते हैं।आठों भैरवों के नीचे आठ-आठ भैरव होते हैं। यानी कुल 64 भैरव माने गए हैं। सभी भैरवों पर महा काल भैरव द्वारा ...